अंतिम स्मृतियाँ (Last Memories)

यह एक पत्ते की छोटी सी कहानी है, जो अपने परिवार से बिछड़ कर धरा पर आन पड़ा है और अंतिम सांसे गिन रहा है। उसके नेत्रों  के सामने सारी यादें चलचित्र बनकर उभर रही हैं। उसका एक मार्मिक चित्रण इस छोटी सी कविता में समाहित है। यदि कविता अच्छी लगे तो कमेंट और शेयर कर दिजिए ,धन्यवाद।

(This is a short story of a leaf, who is separated from his family and lies on the earth and is counting the last breath.  All the memories are playing in front of his eyes as a movie.  A poignant portrayal of it is contained in this short poem. If the poem looks good, please comment and share, thanks)

अंतिम स्मृतियाँ (Last Memories)

यह टूटा हुआ पत्ता पूछे,
पहले मैं भी था हरा – हरा,
सारे पत्तों संग खेला करता,
मेरा भी था परिवार बड़ा,
जब बच्चों ने झूला डाला,
तब सावन का लगा पता,
पींग मारते झूले पे,
जब आते ऊपर बच्चे,
सचमुच कितना अच्छा लगता,
झूम उठते हम सब पत्ते,
सूख गया आयु पूरी कर,
लटक गया बूढ़ा बनके,
साथ मेरा सबने छोड़ा,
जोश जवानी में तनके,
फिर पत्ते की आंखें मूंदीं,
मन उतर गया गहरे तल में,
सांसें टूटीं छूटा दामन,
अंतिम हिचकी ली नश्वर ने l


If you liked this poem of mine, please write your comment in the comment box below and do not forget to share the post,
Regards, Jasvinder Singh, Himachal Pradesh

7 thoughts on “अंतिम स्मृतियाँ (Last Memories)

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