“जाने दे” (Let it go)

हम अक्सर पुरानी बातों को अपने सर पर कूड़े की तरह ढोते रहते हैं और वह कूड़ा कब हमें कुंठित और बीमार कर देता है, हमें पता भी नहीं चलता। उस कूड़े की टोकरी को फेंककर आगे बढ़ जाना चाहिए।
We often carry old things like garbage on our head and when that waste makes us frustrated and sick, we do not even know. That garbage basket should be thrown and proceeded.

जो बीत गई
वह बात गई,
जो बात गई,
उसे जाने दे,
जिसमें था गम
और तेरी उदासी,
वह रात गई
उसे जाने दे,
मनहूस समझ
न उसे पकड़,
बहला ले दिल
उसे जाने दे,
आँसू थे जहाँ पर
नमक भरे,
उन्हें पोंछ के
मीठा खाने दे,
था कभी जो गम
कर उसको कम,
अब रीत नई
अपनाने दे,
जो खुशी मिले,
ले उसे पकड़,
था जो भी बुरा,
मिट जाने दे,
धागा गाँठें बन
उलझा था,
न वक्त गंवा
सुलझाने में,
जो रुका था पानी
बन कीचड़,
उसे छोड़ जरा
बह जाने दे,
माथे पे कितने सारे बल,
उन्हें झाड़ जरा
गिर जाने दे,
यह होंठ जो तेरे
लटके हैं,
उन्हें खुल के तूँ
मुस्काने दे,
कोई ढूंढ बहाना
खुशियों का,
खुद को खुशियाँ
बन जाने दे।


Please comment if you like this post and please don’t forget to share. Regards, Jasvinder Singh, Himachal Pradesh

37 thoughts on ““जाने दे” (Let it go)

    1. आशीष मिलती है आपसे मुझको बारम्बार, मिलता रहे यह आपका आशीर्वाद हर बार 🙏😊

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  1. सत्यवचन.. इसी सकारात्मक सोच से, बिना किसी कुंठा से, आगे बढा जा सकता है।

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