“श्री गणेश” (Sri Ganesh)

गणेश जी के हर अंग से हमें कुछ न कुछ सीख मिलती है। यदि हम ध्यान से देखें तो हर एक अंग विशेष ज्ञान देता है….उसी का वर्णन इस कविता में समाहित है।
We learn something from every part of Lord Ganesha. If we look carefully, each organ gives special knowledge …. The description of that is contained in this poem.

श्री गणेश जय गणेश,
दे हमें प्रेरणा,
दे हमें प्रेरणा,
मस्तक विशाल की,
दे बड़ी सोच,
महान विचार की,
दे हमें प्रेरणा,
कर्ण विशाल से,
सुनें कर्ण खोल के,
सुनें सदा ही ध्यान से,
दे हमें प्रेरणा,
छोटी सी आंख से,
लक्ष्य ही दिखे सदा,
प्राप्त लक्ष्य को करें,
दे हमे प्रेरणा,
अपनी बड़ी सी सूंड़ से,
उचित अनुचित सूंघ सकें,
उचित को ही ग्रहण करें,
दे हमें प्रेरणा,
उदर विशाल से,
बकें न ज्ञान अज्ञान को,
पचा सकें विचार को,
दे हमें प्रेरणा,
प्रिय मोदक मिष्ठान से,
सात्विक आहार हो,
और स्वस्थ रहें सदा,
दे हमें प्रेरणा,
लघु वाहन मुष्क से,
विजय करें इच्छाओं पर,
कुतरें उन्हें ही सदा,
दे हमें प्रेरणा,
अपने शस्त्र पाश से,
अज्ञान और तिमिर रूपी,
बन्धनों से मुक्त हों,
दे हमें प्रेरणा,
सत्कर्मों से युक्त हों,
श्री गणेश जय गणेश,
तेरी सदा ही जय हो।


Please leave your valuable comments and please don’t forget to share. Regards, Jasvinder Singh, Himachal Pradesh

23 thoughts on ““श्री गणेश” (Sri Ganesh)

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