अपना पराया

जीवन भर हम लोगों को परखते ही रह जाते हैं कि यह अपना है या पराया…यहां अपने पराये और पराये अपने बन मिलते –  बिछड़ते रहते हैं। यहां तो हरदम संग चलने वाला दम भी अंत मे पराया हो जाता है…

कोई कहे अपना – कोई पराया,
किसी को कुछ भी समझ न आया,
सब कोई कर्म है अपना लाया,
भोग के हर कोई जग से जाया,
किसको कहें यह है मेरा अपना,
नहीं अपना – अपना ही साया,
जब जन्मा था – हाथ था खाली,
जो पाया सब छोड़ के जाया,
मिले जो संगी – साथी जग में,
अंत में संग न कोई जाया,
सुख में गुड़ में चींटे बन चिपके,
दुख में नजर न कोई आया,
ढूंढे बहुत सहारे व्यर्थ ही,
अंत सहारा भीतर पाया,
अपना हमदम अपने भीतर,
अंतिम दम तक साथ निभाया।


8 thoughts on “अपना पराया

  1. Apna wo jo paraya n ho.
    Sang wo jo gavaya n ho.
    Door door se dekhta raha.
    Sara jahan ghoomta raha.
    Jab apne andar dekha tujhe.
    Sare jahan ne apnaya mujhe….
    Every one should analyse his own
    HONESTY,
    Every one will like u the BEST..

    Liked by 1 person

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