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चौराहा

हम जीवन भर कितनी भी दौड़ भाग कर लें, इस जीवन को असली मान बैठें, परन्तु असल में तो एक दिन रुक ही जाना है और अपने असली घर वापिस जाने के लिए असली चौराहे यानी श्मशान या कब्रस्तान आना ही है, यही वास्तविकता है।

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