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मैं रहता हूँ उस देश में

मैं रहता हूँ उस देश में,जहाँ नानक की भक्ति है,गुरु गोबिंद की शक्ति है,जहाँ धर्म की आन की खातिर,शीश लुटाए जाते हैं,जहाँ पे मांओं के बच्चे,चक्की में पिसाए जाते हैं,जहाँ पे नन्हे नन्हे प्राण,भालों पे नचाए जाते हैं,जहाँ फतेह जोरावर सिंह,दीवारों में चिनाए जाते हैं,जहाँ गुरु अर्जुन देव जी,अंगारों पे बिठाए जाते हैं,जहाँ पे भाई … Continue reading मैं रहता हूँ उस देश में

आज विश्व पर्यावरण दिवस (5th June 2021) के अवसर पर नालागढ़ साहित्य कला मंच की online कवि गोष्ठी में भाग लेने का सुअवसर प्राप्त हुआ, जिसमें मुख्य अतिथि श्री यशुदीप सिंह जी (DFO) और विशिष्ट अतिथि श्री बलबीर भारद्वाज जी (APRO) थे। सभी प्रबुद्ध साहित्यकारों की पर्यावरण पर आधारित रचनाएं सराहनीय थीं।

काश

“विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष”              कभी – कभी लगता है कि हमारी पृथ्वी जैसी थी, वैसी ही शुद्ध फिर से हो जाए। परन्तु इसके लिए सभी को अपने – अपने स्थान पर इसके लिए विशेष प्रयत्न करने होंगे।

समय Time

समय को समझने के लिए व्यक्ति को समय में खो जाना पड़ता है…
One has to be lost itself into time to understand time….
Samay ko samajhne ke liye vyakti ko samay mein kho jana padta hai…

समय Time

समय को समझने के लिए व्यक्ति को समय में खो जाना पड़ता है…
One has to be lost itself into time to understand time….
Samay ko samajhne ke liye vyakti ko samay mein kho jana padta hai…

सांझ की सुबह Dawn of Dusk

अक्सर हम शाम के समय घबराहट महसूस करते हैं। लेकिन हम सुबह के समय ताजगी और ऊर्जा महसूस करते हैं। ऐसा क्यों होता है?
Aksar hum shaam ke samay ghabaraahat mahasoos karate hain, lekin subah ke samay taajagee aur oorja mahasoos karate hain. Aisa kyon hota hai?
Often we feel nervousness at the time of dusk. But we feel freshness and energy at the time of dawn. Why it happen?

तुलना Comparison

वैसे तो मनुष्य का स्वभाव आरम्भ से ही दूसरों से अपनी तुलना करने का रहा है। वह या तो दूसरे से श्रेष्ठ बनना चाहता है या दूसरे को श्रेष्ठ बनते देखते हुए देख कर मन ही मन कुढ़ता है।
पर जो दूसरों से अपनी तुलना नहीं करता…वास्तव में वही श्रेष्ठ होता है।

From the very beginning human nature has been to compare himself with others. He either wants to be superior to the other, or seeing the other becoming superior, he become upset.
But the one who does not compare himself to others … Actually he is the best.

Waise to manushya ka swabhav aarambh se hi dusron se apni tulna krne ka raha hai. Woh ya to dusre se shreshth banna chahta hai ya dusre ko shreshth bante dekh mann hi mann kudhta hai. Par ji dusaron se apni tulna nahi karta…Wastav mein wohi shreshth hota hai.

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