साहस

खुद को बदकिस्मत मान कर तकदीर के हवाले करने से अच्छा है कि हम नए उत्साह के साथ संघर्षों से जूझ कर अपने बदरंग जीवन में नए रंग भरें और खुश रहें।

कितने भी वेग से मुझे
डुबा ले ऐ तकदीर,
देख लेना दूने वेग से मैं
फिर ऊपर आऊंगा,
न उखड़ेगी सांस मेरी
डुबाने से तेरे,
फेफड़ों में साहस की
सांसें भरता जाऊंगा,
जब जब भी लेगी
परीक्षा तूं मेरी,
करेगी जब भी
समीक्षा तूं मेरी,
करूंगा हर पर्चे को
पूरे दिल से मैं हल,
होके उत्तीर्ण हर बार
दिखलाऊंगा,
मिले संग किसी का
या जूझूं अकेले,
हर इक पल चहकता
नजर आऊंगा,
रहें चाहे कांटे
हर डाल पे मेरे,
बीच उन्ही के मैं
खिल जाऊंगा,
बुझा न पाएगी रोशनी
तूं मन की मेरी,
बन सितारा मैं
नभ पर टिमटिमाऊंगा,
भरूंगा रंग सच्चे जीवन में अपने
तकदीर नई मैं लिख जाऊंगा
तकदीर नई मैं लिख जाऊंगा।


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चिंता Worries

जीवन में सुख व दुख दोनों ही अपने निर्धारित समय पर आते जाते रहते हैं। सुख के तो कहने ही क्या…वह तो दुख ही है जो बेचैनी, चिंता व अवसाद देता हुआ चिता ही बन जाता है, पर यदि इस चिता रूपी चिंता को चिंतन में परिवर्तित करने का प्रयत्न करें तो मन शांत व स्थिर होना शुरू हो जाता है।
Both happiness and sorrow keep coming and going at their fixed time in life. Happiness is amazing. It’s the only sadness that turns into a pyre giving restlessness, anxiety and depression, but if you try to convert this grave-like worry into positive contemplation, then the mind starts to become calm and stable.

चिंता तोड़े तन बदन को
निचुड़े सारा मन मस्तिष्क
चिंता माने हार पल भर में
करे विचारों को संकुचित
ग्रीवा झुके हर इक के आगे
शब्द न हों मुख से स्फुटित
भूले सद् राहें रहे भ्रमित
स्थिर न हो पाए चित्त
मेल जोल सब छोड़ छाड़ कर
एकांत में रहे व्यथित
हंसना गाना भूल भाल सब
बैठ रोए कोने में नित
जिसकी बैचैनी बनती चिंता
मृत समान वह रहता जीवित
चिंताओं के पार क्षितिज है
असीमित व अपरिमित
चहुँ ओर प्रकाश की फैलीं किरणें
किंचित मात्र भी नहीं तिमिर
बरखा बहार संग गुनगुनाए
सुगंध बयार में घुल जाए
ऐसा हो सकता है सच में
जब चिंता चिंतन बन जाए
जब चिंता चिंतन बन जाए।


Dreams

Come, dream with your eyes awake and start making them come true from today itself…

I saw different types of dreams while sleeping at nights
Someone was sour
Someone was sweet
Someone was bitter
Someone was astringent
Someone was toxic
Someone was annoying
Happiness in someone
Bemoaning in someone
Helplessness in someone
Found in someone
Lost in someone
Someone was meaningless
Someone with amazing beaty
Someone with horrible scenes
Saw an angel in someone
Saw messenger of
death in someone
All the dreams I have seen
while sleeping till today
are all illusions of the mind
Only those dreams come true
what you see with
your awake eyes
Accept all challenges
to fulfill your dreams
Don’t give up till the end
Darkness will disappear surely
And then everyone
will appreciate you.


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प्रकाश Light

Happy Diwali

नहीं था जब कुछ भी यहां,
तिमिर – प्रकाश का जन्म हुआ,
तब से लेकर वर्तमान तक,
दोनों में संघर्ष हुआ,
तिमिर था फैला दूर दूर तक,
इसका अपना राज्य था,
नहीं था इसमें कुछ भी पनपा,
फिर प्रकाश विजयी हुआ,
सूर्य रश्मियां फैलीं जैसे ही,
नवजीवन का उदय हुआ,
छंटा तिमिर – प्रकाशित ब्राह्मण्ड,
प्रसन्नता का वास हुआ,
केवल एक दीप बहुत है,
इस दीवाली तिमिर मिटाने को,
प्रज्ज्वलित दीप हो बाहर भीतर,
खुशहाली को लाने को,
मिटे विकार – छंटे अंधकार,
है यही आस दीवाली को।

उलझन Confusion

हम अक्सर इन्हीं उलझनों से घिरे रहकर परेशान और उदास रहते हैं कि संसार में वह ऐसा क्यों है और मैं…जिस दिन यह सब छोड़कर हम सत्कर्मों में लग जाते हैं, उसी दिन से उलझनों की गांठे सुलझना शुरू हो जातीं हैं…
We are often troubled and sad by being surrounded by these confusions that why every person and personality is so different…The day we leave all this and engage in good deeds, from that day the knots of confusion start to unravel.

सबकी अपनी अपनी बुद्धि,
सबके पास है अपना मन,
कोई तरसे दाने दाने को,
किसी के घर है धन ही धन,
कोई कलूटा काला बदसूरत,
किसी का स्वर्ण सा दमके तन,
किसी के मुख से झड़ते फूल,
कोई फुंफकारे काढ़ के फन,
कोई फाड़े कपड़े सबके,
कोई सबके लिए सज्जन,
सबके अपने कर्म – अपना स्वभाव,
छोड़ दे तूं सारी उलझन,
कर सत्कर्म – बन पावन – तप के,
सदा नहीं रहता जीवन।


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दो अक्टूबर

दो अक्तूबर को भारत में,
दो सुगंधित फूल खिले,
पर जीवन भर राहों में,
कांटें ही उनको बिछे मिले,
विपरीत परिस्थितियों में ही,
वह जीवन भर घिरे रहे,
पर कभी उन्होंने हार न मानी,
संघर्षों में लगे रहे,
बापू का स्वदेशी का नारा गूंजा,
जब चरखे का चक्र चला,
हर इक जन तक खादी पहुंचा,
और विदेशी वस्त्र जला,
जय जवान जय किसान कहा
शास्त्री जी ने,
किसानों का उचित सम्मान किया,
उनके पराक्रम के चलते सेना ने,
पाकिस्तान परास्त किया,
आओ हम भी लग जाएं,
उनके सपने सच करने में,
रंगें देशभक्ति में खुद को,
जुट जाएं देश को विकसित करने में,
जल-थल-वायु करें साफ,
स्वच्छ भारत का लें संकल्प,
स्वस्थ तन-मन रखने में,
स्वच्छता का नहीं है कोई विकल्प,
अब लग जाएं हम स्वच्छता में,
आभा से हर कोना दमके,
छा जाएं जग के नभ पे,
बन के सूरज भारत चमके ।


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मानसिक आजादी Mental Freedom

आजाद होते हुए भी हम कहीं न कहीं से विदेशी संस्कृतियों के जाल में फंसे हुए हैं। वह हमारी पवित्र पुरातन संस्कृति को तेजी से अपना रहे हैं और हम उनकी। इस जाल को काटकर हमें मानसिक रूप से स्वतंत्र होना होगा।

तोड़ गुलामी की जंजीरें,
आजादी की अलख जगाई,
देश – कौम के मतवालों ने,
अपनी – अपनी बली चढ़ाई,
वर्तमान हम गौर से देखें,
आजाद नहीं हैं आज भी हम,
पाश्चात्य संस्कृति सर चढ़ बोले,
अपना सब कुछ भूल गए हम,
कभी हुआ करता था भारत,
आज अभी से दो गुना,
कितना कुछ छिन गया है हमसे,
अब हो गया यह बौना,
ज्ञान समस्त लेकर हमसे ही,
पश्चिम आगे और बढ़ा,
हमसे ही सब छीन- छान कर,
उन्नति के शिखर पे जा चढ़ा,
दे अपनी भौंडी असभ्यता,
नव पीढ़ी को बर्बाद किया,
संस्कृति सभ्यता ले भारत की,
ह्रदय से अंगीकार किया,
अब भी समय है चेत जाओ,
तोड़ गुलामी की जंजीरें मन से,
नवयुग का निर्माण करो,
स्वयं को आजाद करो।।


चलते रहिए Keep going

हम अपनी जिंदगी में कितनी ही हद तक परेशान भले ही क्यों न हो जाएं, गमों के बोझ तले भले कितना ही क्यों न दब जाएं। पूरी हिम्मत से फिर से आगे बढ़ने पर कामयाबी जरूर मिलती है।
Even if we get disturbed to some extent in our life, no matter how much we get buried under the burden of sorrows. Success is definitely achieved if you move forward again with full courage.

दिल में जले चिराग को,
बुझने न दीजिए,
जिंदगी को खुद पे बोझ,
बनने न दीजिए,
जमाने की ठोकरों से,
लड़खड़ा भले ही जाईए,
बुरे वक्त के दरिया में,
डूबीए – उतराईए,
उठिए…हिम्मत तो कीजिए,
खुद को सम्भालिए,
चलने से ही तो है जिंदगी,
कदम बढ़ाईए,
चलना न कम कीजिए,
चलते ही जाईए,
जिस्म तो है एक जरिया,
केवल इसे न देखिए,
ताकत का जरिया तो है रूह,
रूह में उतर के तो देखिए,
आगे है रोशन राह,
आगे चल के तो देखिए।


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जागो Wake up

हमारी पूरी जिंदगी जोड़ – घटाव यानी सुख का पीछा करने में ही बीत जाती है और हम असली सुख देने वाले को बिसारते रहते हैं, परन्तु सोते से जागने और सच्चे सुख को पाने की शुरुआत कभी भी हो सकती है।

उम्र बढ़ती रही,
मैं बिगड़ता रहा,
लालसा बढ़ती रही,
मैं बढ़ाता रहा,
मासूमियत छोड़ कर,
वह बचपन की,
जवानी में गोते लगाता रहा,
मैं जोड़ता रहा,
तमाम उम्र बहुत कुछ,
पर अनमोल सांसें गंवाता रहा,
मैं समझता रहा,
गहरे समंदर में खुद को,
पर कीचड़ में खुद को लिपटाता रहा,
दुनिया को हर पल निहारा किया,
पर खुद से ही,
नजरें चुराता रहा,
जो न करना था,
वह ही किया उम्र भर,
जो था करना,
उसी से किनारा मैं करता रहा,
गर अब भी जाग जाऊं,
सोते से आज भी,
मिलेगा वह जो,
हर क्षण है,
दिल में धड़कता रहा।


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बीज Seed

पृथ्वी पर हरियाली का आरंभ होने से पहले धरती में बीज कहां से आए, यह एक परम् आश्चर्य है एवं उन लघु बीजों के भीतर में कौन सी शक्ति छुपी बैठी है जो समय आने पर इतना विशाल रूप धारण करके सबकी पालना करती है।
Before the beginning of greenery on earth, where did the seeds come from in the earth, it is a great wonder and what power is hidden among those small seeds, which when the time comes, takes such a huge form and sustains everyone.

बीज हैं आते पौधों से,
पौधे हैं आते बीजों से,
यह क्रम यूं ही चलता रहता है,
न जाने कितने युग से,
नहीं है कोई जान सका,
आए यह बीज कहां से,
क्या पहले से ही थे ढेरों,
या आए हैं उस एक से,
आरंभ हुआ है जीवन का,
इन अनगिनत बीजों से,
देते जीवन जीवों को,
बन फूल – फसल – फल – सब्जी से,
शुद्ध वायु – लकड़ी देते,
अपनी पावन हरियाली से,
होता आश्चर्य कैसे बनता,
वृक्ष विशाल लघु बीजों से,
लग जाते नव निर्माण में,
ज्यों ही मिलते धरती मां से,
नमन उसे जो देता शक्ति,
बीजों को भीतर से।


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सांझ की सुबह Dawn of Dusk

सांझ को दिल थोड़ा घबराया,
पड़ा सोच – कुछ समझ न आया,
कुछ हल्का सा पीया – खाया,
कुछ पढ़ा – सुना – कुछ गुनगुनाया,
पर अनमने मन को रास न आया,
युक्ति हुई न कोई कारगर,
दिल को अपने डूबता पाया,
सब बात भुला – करके साहस,
जोर लगा के भीतर मन का,
परदा सांझ का जरा उठाया,
था घोर अंधेरा – दिखता न था,
मीलों घण्टों खुद को भटकाया,
चूर हुआ पर हार न मानी,
मद्धिम प्रकाश नजर था आया,
रात्रि कालिमा भंग हो गई,
फटी पौ – सूरज चढ़ आया,
अब जान लिया था मैने भी,
सांझ को दिल था क्यों घबराया,
बिछड़ के अपने ही प्रकाश से,
सुख और किसी में नहीं था आया,
पर उस सांझ का अंत मधुर था,
अब था मुझको समझ में आया।


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अंतर् दर्शन

ईश्वर के पावन स्वरूप का सम्पूर्ण वर्णन न ही कोई पुस्तक कर सकती है और न ही कोई मनुष्य, चाहे उसने दर्शन पा भी लिए हों। और अपने भीतर उसी को उनके पवित्र दर्शन हो सकते हैं, जिसने स्वयं को ईश्वर के लिए सम्पूर्ण रूप से समर्पित कर दिया हो।

अर्धचन्द्र
संग बिन्दी मस्तक,
देख हुआ
सब जग नतमस्तक,
दमके तेज
तुम्हारा ऐसा,
नेत्र हुए
जाते हैं चकमक,
लगा रहे जो
केवल तुझमें,
नहीं दिखा है
कोई अब तक,
कोई विरला
होता जग में,
जिसके द्वार
तू देता दस्तक,
नहीं समझ पाता है
तुझको,
लगा के बुद्धि
कोई विचारक,
वर्णन करे
समूचा तेरा,
नहीं है ऐसी
कोई पुस्तक,
वर्णन तेरे
अंतर् दर्शन का,
नहीं है आता
किसी के लब तक,
कृपा करे अपनी
जिस ऊपर,
केवल वही है
पहुंचे तुझ तक,
करो कृपा हे नाथ
अब मुझ पर,
द्वार खड़ा है
तुमरा बालक,
हे दीन दयाल
अनाथ के नाथ,
तुम स्वामी
मैं तुमरा सेवक।


कृपया मेरी वेबसाईट पे विजिट करके मुझे प्रोत्साहित करें…धन्यवाद http://www.keyofallsecret.com

सत्य का दीप Lamp of Truth

यदि हमें अपने समस्त प्रारब्ध की स्मृति हो जाए तो हो सकता है कि हम लज्जा से स्वयं से ही दृष्टि न मिला पाएं। तो क्यों न हम इस बार स्वंय में सुधार लाकर अपना स्वर्णिम भविष्य सुनिश्चित करें।
If we get power to memorise our all previous lives, may be we become shy for our misdeed.
So why don’t we ensure our golden future by improving ourselves in this present life.

दृष्टि दर्पण से मिलाकर,
देख ले अंतर पतित,
जन्मों जन्मों का किया,
जो हो गया है विस्मृत,
स्मृत जो हो जाएगा तो,
हो जाएगा फिर लज्जित,
कर ले तौबा दुष्कर्मों से,
दिल से कर ले प्रायश्चित,
छोड़ दे लालच,
और कितना करेगा एकत्रित,
कर ले अध्ययन गहन,
विचार कर ले संकुचित,
अब न कर अपना पराया,
स्वयं में हो प्रतिष्ठित,
कर के खेती प्रेम की,
सच को कर ले अंकुरित,
तोड़ बेड़ी सीमाओं की,
कर स्वयं को असीमित,
मांज धूमिल अंतःकरण,
और कर ले उज्जवलित,
जला के दीप सत्य का,
कर ह्रदय में प्रज्ज्वलित।


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प्रेम गली Alley of Love

परम् सत्ता का कोई अलग घर नहीं है। उसके घर का रास्ता हमारे घर में ही है… आवश्यकता है तो उस गली, उस रास्ते को खोज निकालने की, जिसे सन्तों ने प्रेम का मार्ग बताया है। उसी प्रेम पथ पर अग्रसर होना ही हमारा भविष्य है।
There is no separate house of Almighty God . The way to his house is situated inside us….there is need to find that alley, that path, which is named by Saints “the path of love”. Walking on the same love path is our future.

ली तेरी मिली नही,
ढूंढती मैं थक गई,
करे जतन सारे मगर,
अंत में मैं रुक गई,
मान ली है हार मैने,
और न चल पाऊंगी,
ढूंढने तुझे बता,
अब किधर को जाऊंगी…

पगली रुक जा जरा,
मत दौड़ तू,
थम जा जरा,
न भाग तू इधर उधर,
गली गली शहर शहर,
ढूंढने से यूं मुझे,
ढूंढ न तू पाएगी,
ईंट पत्थरों के घर में,
बस भटकती जाएगी,
डुबकियां लगाएगी,
परिक्रमा को जाएगी,
घूम घूम फिर घूम के,
स्वयं को वहीं पे पाएगी,
जिस समय तू स्वयं से,
मित्रता कर पाएगी,
अपने ही संग में मुझे,
बैठा हुआ तू पाएगी,
नहीं गली मेरी कोई,
इस नगर या उस नगर,
अपनी गली में झांक ले,
मुझमें ही तू समाएगी।


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