हल

ऐसी कोई समस्या नहीं, जिसका हल…जिसका समाधान…जिसका उपाय…जिसकी काट न हो। चिंता करना मतलब अपनी समस्याओं की आग में और झुलस जाना…
बिना आपा खोए शांत बैठकर ठण्डे दिमाग में अपने आप हल निकलते रहते हैं…

ऊपर ऊपर जमी है काई
भीतर बहता निर्मल जल
नहीं है ऐसा कुछ भी दुर्गम
जिसका नहीं है कोई हल
तोड़ दीवारें हटा दे रोड़े
तान के सीना बढ़ता चल
सोच में न यूं मल हाथों को
खोज ले मोती गहरे तल
कल गया खाली कल क्या होगा
यह सोच न देती कोई फल
हर पल भीतर भरी है शक्ति
व्यर्थ न जाए कोई पल
आज अभी से जोर लगा दे
नहीं है आता कभी भी कल
मिथ्या चिंता यूं जैसे दलदल
निज जीवन से करती छल
नकारात्मक सोच मरुस्थल
सकारात्मक बरसाए जल
छोड़ तपिश भरी चिंता को
खुशियों के खुल जाएं नल
रोक दे लहरें चिंताओं की
शांत चित्त रह बिन हलचल
नव उत्साह से बढ़ आगे को
सब परेशानी होगी हल ।।


Please follow http://www.keyofallsecret.com

काश

“विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष” कभी – कभी लगता है कि हमारी पृथ्वी जैसी थी, वैसी ही शुद्ध फिर से हो जाए। परन्तु इसके लिए सभी को अपने – अपने स्थान पर इसके लिए विशेष प्रयत्न करने होंगे।

जब हम न थे – जब तुम न थे,
जब धरा हरी और भरी सी थी,
कितना जल था – कितनी प्रकृति,
ऊंचे पर्वत – गहरे समुंद्र,
सारी नदियां कल – कल करतीं,
चहुं ओर थे वन – हरियाली थी,
न नगर ही थे – न डगर ही थे,
न सीमा थी – न देश ही थे,
वर्षा सिंचित करती रहती,
मिट्टी सारी सोंधी सी थी,
न गैसें थीं – न प्रदूषण,
था पवित्र वातावरण,
काश – अब भी ऐसा हो जाए,
यह मानवता संभल जाए,
लोलुपता सब मिट जाए,
यह वन संपदा बढ़ जाए,
शुद्ध पवन चहुं ओर बहे,
सब महामारियां मिट जाएं,
हर मन में निश्चय हो जाए,
हर घर में पौधे लग जाएं,
घर – घर हरियाली लहराए,
स्वर्ग सी पृथ्वी हो जाए,
सबके मन फिर से खिल जाएं।


Please follow http://www.keyofallsecret.com