गुरु गोबिंद सिंह जी

प्रकाश पर्व

वाह गुरु प्रकाश हुआ जब तेरा
सूरज को नया नूर मिला
चमके तारे अजब चमक से
चंद्रमा का प्रकाश बढ़ा
मृत प्रायः समाज के भीतर
नई उमंग नया जोश चढ़ा
मुरझाते धर्म के पौधों में
नव जीवन का संचार हुआ
रोती मिटती मरती जनता ने
सन्त सिपाही रूप धरा
अमृत पाकर धन्य हुए सब
सबमें शक्ति का रूप दिखा
माता पिता पुत्र सब वारे
तब ही तो सच धर्म बचा
हे गोबिंद तेरी क्या कीरत गाएं
तुझसे ही भारत वर्ष सजा
तुझसे ही भारत वर्ष सजा


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