सच ही सच

यहां जो चाहो
मिट जाता है
यहां जो चाहो
छिन जाता है
यहां जो रखो
लुट जाता है
यहां हर ओर है फैला झूठ
सच समझा – मिथ्या बन जाता है
यहां नहीं है सच में कुछ भी
दृष्टि का फैलाव है
गुब्बारे ज्यों भरी पवन
पल में फूटे
बिखराव है
सच यहां नही है
वहां नहीं है
केवल भीतर छुपा हुआ है
बाहर छोड़ जब झांका भीतर
सच रत्न ह्रदय में जड़ा हुआ है।


आइए…www.keyofallsecret.com के साथ मिलकर सच की खोज करते हैं