साहस

खुद को बदकिस्मत मान कर तकदीर के हवाले करने से अच्छा है कि हम नए उत्साह के साथ संघर्षों से जूझ कर अपने बदरंग जीवन में नए रंग भरें और खुश रहें।

कितने भी वेग से मुझे
डुबा ले ऐ तकदीर,
देख लेना दूने वेग से मैं
फिर ऊपर आऊंगा,
न उखड़ेगी सांस मेरी
डुबाने से तेरे,
फेफड़ों में साहस की
सांसें भरता जाऊंगा,
जब जब भी लेगी
परीक्षा तूं मेरी,
करेगी जब भी
समीक्षा तूं मेरी,
करूंगा हर पर्चे को
पूरे दिल से मैं हल,
होके उत्तीर्ण हर बार
दिखलाऊंगा,
मिले संग किसी का
या जूझूं अकेले,
हर इक पल चहकता
नजर आऊंगा,
रहें चाहे कांटे
हर डाल पे मेरे,
बीच उन्ही के मैं
खिल जाऊंगा,
बुझा न पाएगी रोशनी
तूं मन की मेरी,
बन सितारा मैं
नभ पर टिमटिमाऊंगा,
भरूंगा रंग सच्चे जीवन में अपने
तकदीर नई मैं लिख जाऊंगा
तकदीर नई मैं लिख जाऊंगा।


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