“आलू” (Potato)

मेरी इस हास्य कविता का आनंद लीजिए। 😊

मैं सीधा भोला भाला,
आलू था मोटा लाला,
गालें थीं मेरी लालम लाल,
नाम पहाड़ी मस्त थी चाल,
लाड प्यार से बड़ा हुआ था,
ठेले पे मैं खड़ा हुआ था,
ठेला घूम रहा था जब तो,
हाथ बांध मैं अकड़ रहा था,
तभी किसी ने हाथ बढ़ाया,
बड़े प्यार से मुझे उठाया,
मैं तो कुछ भी समझ न पाया,
झोले में झटपट समाया,
नहला धुला के मुझको छीला,
डर से मैं हो गया था पीला,
बड़ी छुरी से मुझको काटा,
तन बदन को ऐसे बांटा,
बोला बगल में रखा आटा,
ले अब कर ले सैर सपाटा,
नाम का ही तो था मैं राजा,
बजा दिया था मेरा बाजा,
खाने से मुझे क्या है लाभ,
निकले तोंद हो जाये जुलाब,
मुझमें भरी है खूब मिठास,
होगी शुगर फूलेगी सांस,
अरे अब तो तुम डर जाओ जी,
मुझको न तुम खाओ जी,
हरी भरी सब्जी भी खाओ,
सेहत स्वस्थ बनाओ जी।


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