“छोड़ दो”(Leave it)

क्रोध से दूसरे का कम, अपना अधिक नुकसान होता है। शरीर और मन पर दुष्प्रभाव तो पड़ता ही है, कभी कभी इस कारण धन की हानि भी सहनी पड़ती है। इसके आते ही इसकी विदाई करना ही जिंदगी को खुशहाल बनाता है।
Anger destroy ourselves more in comparison to others. This is not only bad for body and mind, sometimes it also causes loss of money. It’s farewell as soon as it arrives makes life happy.

क्यों खफा हो,
क्यों दुखी हो,
किससे है नाराजगी,
है चार दिन की चांदनी,
फिर कहां है जिंदगी,
गई है तन क्यों भृकुटी,
अकड़ है ज्यों हो लकड़ी,
भड़क के ज्वाला क्रोध की,
भस्म करती जाएगी,
तन मन और धन को भी,
राख में मिलाएगी,
वक्त जो कुछ भी मिले,
थोड़ी सी कर लो बंदगी
छोड़ दो यह गुस्सा वुस्सा,
आ जायेगी ताजगी,
मुस्कुरा लो खिलखिला लो,
यही तो है जादूगरी,
जिंदादिली से जो जियो,
खुशहाल होगी जिंदगी।