मैं रहता हूँ उस देश में

मैं रहता हूँ उस देश में,
जहाँ नानक की भक्ति है,
गुरु गोबिंद की शक्ति है,
जहाँ धर्म की आन की खातिर,
शीश लुटाए जाते हैं,
जहाँ पे मांओं के बच्चे,
चक्की में पिसाए जाते हैं,
जहाँ पे नन्हे नन्हे प्राण,
भालों पे नचाए जाते हैं,
जहाँ फतेह जोरावर सिंह,
दीवारों में चिनाए जाते हैं,
जहाँ गुरु अर्जुन देव जी,
अंगारों पे बिठाए जाते हैं,
जहाँ पे भाई मतीदास,
आरों पे चढ़ाए जाते हैं,
जहाँ पे भाई मनी सिंह,
अंग-अंग कटवाए जाते हैं,
जहाँ चांदनी चौक में गुरु,
शीश लुटाए जाते हैं,
जहाँ गीदड़ से परिवर्तित कर,
सिंह सजाए जाते हैं,
जहाँ पे सन्तों के द्वारा,
भगवान मिलाए जाते हैं,
हाँ, मैं रहता हूँ उस देश में।


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