खुशियां Happiness

अक्सर हम खुशियों को बाहर ढूंढते फिरते हैं। इसमें क्षणिक खुशियां तो मिल जातीं हैं पर फिर से वही उदासी हमें घेर लेती है। जबकि इसके विपरीत खुशियां तो हमारे भीतर सदा से ही विद्यमान हैं… आवश्यकता है उन्हें भीतर से ही खोज निकालने की। प्रस्तुत है हल्के फुल्के हास्य के साथ यह कविता… Often we search happiness outside and we get success but for a short time and again the same sadness surrounds us. While on the contrary, happiness always exists within us… There is need to find it from within…Presenting poetry with light hearted humor…

आज मैने खुशियां,
ढूंढ़ने की थी ठानी,
मल्टीप्लेक्स में पिक्चर देखी,
मैने ‘राजा जानी’,
हाल में जाकर ली थी,
मैने बोतल पानी,
इतनी मंहगी पेटिस तो,
मैने नहीं थी खानी,
अनमने मन से वहाँ से,
मैने की रवानी,
घुस गया बढ़िया रेस्टोरेंट में,
जेब थी पड़ी गंवानी,
खुशियां मिलीं न मुझको,
उल्टे याद आ गई नानी,
क्यों न पार्क में,
पेड़ पे चढ़ के,
लटक के झूलूं टहनी,
ज्यों ही चढ़ के पेड़ पर मैने,
लात बढ़ा कर तानी,
गिरा जोर से धम्म से नीचे,
अब नहीं रही जवानी,
देख नजारा पास में आई,
एक बुजुर्ग परनानी,
कहां पे खुशियां ढूंढ़ रहा तूं,
कर कर के मनमानी,
वह तो तेरे भीतर ही हैं,
बाहर कहां मनानीं,
सोच ध्यान से,
खोज ले भीतर,
बन कर के तूं ज्ञानी,
तेरे ही भीतर हैं मालिक,
और है संग भवानी,
खुरच उदासी फेंक दे कूड़ा,
खुशियां स्वयं आ जानीं।


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