प्रेम गली Alley of Love

परम् सत्ता का कोई अलग घर नहीं है। उसके घर का रास्ता हमारे घर में ही है… आवश्यकता है तो उस गली, उस रास्ते को खोज निकालने की, जिसे सन्तों ने प्रेम का मार्ग बताया है। उसी प्रेम पथ पर अग्रसर होना ही हमारा भविष्य है।
There is no separate house of Almighty God . The way to his house is situated inside us….there is need to find that alley, that path, which is named by Saints “the path of love”. Walking on the same love path is our future.

ली तेरी मिली नही,
ढूंढती मैं थक गई,
करे जतन सारे मगर,
अंत में मैं रुक गई,
मान ली है हार मैने,
और न चल पाऊंगी,
ढूंढने तुझे बता,
अब किधर को जाऊंगी…

पगली रुक जा जरा,
मत दौड़ तू,
थम जा जरा,
न भाग तू इधर उधर,
गली गली शहर शहर,
ढूंढने से यूं मुझे,
ढूंढ न तू पाएगी,
ईंट पत्थरों के घर में,
बस भटकती जाएगी,
डुबकियां लगाएगी,
परिक्रमा को जाएगी,
घूम घूम फिर घूम के,
स्वयं को वहीं पे पाएगी,
जिस समय तू स्वयं से,
मित्रता कर पाएगी,
अपने ही संग में मुझे,
बैठा हुआ तू पाएगी,
नहीं गली मेरी कोई,
इस नगर या उस नगर,
अपनी गली में झांक ले,
मुझमें ही तू समाएगी।


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तुम्हीं तुम हो

हम सबका का एक ही सहारा परब्रह्म पारमेश्वर हैं। सारे आसरे त्याग कर उनसे प्रेम करते ही वह हम सबको अपनी शरण में ले लेते हैं।
Hum sabka ek hi sahara Parbramha Parameshvar hain. Saare aasare tyaag kar unase prem karate hi woh hamen apni sharan mein le lete hain.

तुम्हीं तुम हो
मेरे लिए,
ब्रम्हांड में भी हो,
और पार भी हो,
सर्वज्ञ हो,
मर्मज्ञ हो,
देवी मेरी,
मेरे देव हो,
तुम्हीं तुम हो दाता मेरे,
रखवाले मेरे तुम हो,
शब्द तुम्हीं,
तुम्हीं गीत हो,
वाद्य तुम्हीं,
संगीत भी हो,
घण्टी में तुम्हीं,
बंशी में तुम हो,
डमरू में तुम्हीं,
हर नाद में तुम हो,
रागों में राग हो,
तुम्हीं बैराग्य हो,
तुम्हीं मेरी पुस्तक,
तुम्हीं मेरा ज्ञान हो,
अंखियों में सदा,
बसे तुम हो,
जिधर देखूं,
तुम्हीं तुम हो,
मेरी सदा से,
तुम्हीं प्रीत हो,
मैं खण्डों में विभाजित हुआ जा रहा,
टूटता बिखरता बहा जा रहा,
हे करुणा के सागर,
समेटो मुझे,
तुम्हीं तुम सम्पूर्ण हो,
अखण्ड हो,
तुम्हीं तुम हो,
तुम्हीं तुम हो।

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खुदा God

अब तक मुझे दिखा नहीं,
गल्ती मेरी,
उसकी नहीं,
चिलमन है आँखों में मेरी,
वह नहीं पर्दानशीं,
गल्ती है कानों की मेरी,
अब तक सुनी न धुन बंशी,
जुदा नहीं,
खफा नहीं,
नहीं है गुमशुदा कहीं,
यूँ है तो वह हर कहीं,
अभी यहीं,
सदा यहीं,
यह रुकावट बेवजह नहीं,
इसका भी है इलाज यहीं,
मन बात करता फिर रहा,
चौबीसों घँटे लड़ रहा,
कालिख है खुद पे मल रहा,
धूल में है सन रहा,
जो देखा इसको साफ कर,
हर इक को दिल से माफ कर,
तब जाना,
के क्यूं दिखा नहीं,
अब तक मुझे खुदा कहीं,
देखा पलट के खुद को जब,
जाना के है खुदा यहीं।


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“समाया” Inside

कितने आश्चर्य की बात है कि ईश्वर रोम रोम में समाया हुआ है और रोम रोम ईश्वर में…जो बुद्धि से परे तो है किंतु प्रेम के वश में है।

तेरे भीतर जग समाया,
तू सबके भीतर समाया,
इन नैनों से दिखता जो भी,
वह सब है तेरी ही छाया,
सबकी अपनी सीमा रेखा,
सबकी अपनी अपनी काया,
एक असीमित तो तू ही है,
सब कोई तेरा ही साया,
अणु घूमे परमाणु घूमे,
घूमे ग्रह नक्षत्र बिन पहिया,
करें परिक्रमा तेरी ही सब,
खूब निराली तेरी माया,
स्थिर है तो एक तू ही है,
कहीं न आया कहीं न जाया,
यह कहे मेरा वह कहे मेरा,
सबको अपना ही सुख भाया,
सबके भीतर एक तू ही है,
कौन है अपना कौन पराया,
सब कोई ढूंढे तुझको ही,
यहां न पाया वहां न पाया,
जिसने प्रेम किया खुद मिटकर,
उसी के भीतर तू प्रगटाया।


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“एक” (One)

सबके ह्रदय रूपी मन्दिर में प्रकाशवान एक ही परमात्मा है। नाम चाहे जो रख लें, रूप चाहे जो देख लें, पर वह अनंत एक ही है।
There is only one God illuminated in everyone’s heart temple. Whatever you name, whatever you see but that infinite is only one.

एक ही तो
सत्य है,
एक ही तो
मुक्त है,
एक ही तो
व्याप्त है,
एक ही तो
व्यक्त है,
एक ही
धरा पे है,
आकाश में भी
एक है,
एक ही
ब्रह्माण्ड में है,
और परे भी
एक है,
एक ही से
दो बना है,
दो से ही
अनेक है,
अनेक ही
फैलाव सारा,
अंत में फिर
एक है,
एक ही
आधार है,
एक ही आनंद है,
एक ही में
सुख है सारा,
एक ही
परमानंद है।


“विस्मरण” (Oblivion)

हम भले ही इस जन्म में कितनी ही ऊंचाइयों को छू लें, कितना ही सुखी क्यों न हो जाएं, पर भीतर एक खालीपन, एक रीतापन, कुछ कमीं, कुछ तड़प सदैव महसूस होती है। इसीलिए सुख भोगते हुए भी, आनंद की कमी हमेशा रहती है।
कारण एक ही है, ईश्वर को किए हुए वायदे को भूलना…..जो हम गर्भ में करके आए थे और जन्म लेते ही भूल गए…
विस्मरण को स्मरण में बदलते ही खालीपन भरने लगता है। No matter how much we achieved in our life, no matter how happy we are, but there is always an emptiness, some deficiencies, some yearning. That’s why, even while enjoying happiness, there is always a lack of pleasure. The reason is same, we’ve made promise to God in the womb and forgot as soon as we were born…
As soon as forgetfulness changes into remembrance, emptiness begins to fill.

चावल के दाने से लेकर,
दो बित्तों तक बड़ा किया,
गर्भ में तुझको पाला पोसा,
और धरा पर खड़ा किया,
करी व्यवस्था दूध की,
प्रथम तुझे आहार दिया,
बचपन तूने खेल बिताया,
यौवन का अंहकार किया,
उतरा यौवन ढली जवानी,
अधेड़ावस्था पार किया,
हुआ जीर्ण बदन अब तेरा,
जीवन का उपहास किया,
भूल गया जब तूँ भीतर था,
अंधकारमय जीवन था,
नौ माह तक तूँ कष्ट में लटका,
नर्क में तेरा डेरा था,
की प्रार्थना हे भगवन,
मुझे बचा इस जाल से,
उलझ गया हूँ पुलझ गया हूँ,
ले उबार जंजाल से,
रख ले मुझको बचा ले जीवन,
अब तूँ मुझको पाल ले,
करता हूँ वादा मैं तुमसे,
बाहर जब मैं जाऊंगा,
फँसूंगा न किसी और कृत्य में,
सुमिरन करता जाऊँगा,
भूल गए जो याद करो,
सोचो और विचार करो,
अभी नहीं बिगड़ा कुछ बंदे,
सुमिर के निज कल्याण करो।