लौट आ ऐ बचपन

होश संभालने के बाद से लेकर जब तक हम मासूम रहते हैं…वह अवस्था कितनी अच्छी होती है…वह समय कितना मधुर होता है…जैसे जैसे समझ बढ़ती जाती है, उस मधुरता का रस भी सूखने लगता है। काश, फिर से वही निस्वार्थ मस्ती भरा बचपन फिर से लौट आए…

ऐ बचपन तू लौट के आ,
जब मिलजुल के सब रहते थे,
अपना भी था परिवार बड़ा,
फूल खुशी के खिलते थे,
न कोई किसी की भाभी थी,
न कोई किसी का देवर था,
न किसी से कोई रंजिश थी,
न किसी के मुख पे तेवर था,
न जीजा थे न साली थी,
न घरवाली मतवाली थी,
दादा दादी की पलकों की,
छांव खूब घनेरी थी,
रोज कथा कहानी सुनते,
पलकों की छांव में रहते थे,
खुशी गमीं के मौकों पर,
रिश्तेदार जो आते थे,
हिस्सा बन कर हम सबका,
परिवार में ही घुल जाते थे,
पापा की आंखों के डर से,
अनुशासन में सब रहते थे,
मम्मी की लाड लडैया में,
छोटे सपने सच होते थे,
भईया दीदी की पकड़ के उंगली,
मेले में घूम के आते थे,
लड़ते भी थे भिड़ते भी थे,
पर अंत में भूल सब जाते थे,
हर शाम मोहल्ले के बच्चों संग,
खूब मस्तियां करते थे,
हर खेल को खेला करते थे,
कपड़े मिट्टी में सनते थे,
न ट्यूशन थी न लेक्चर था,
न ऑनलाइन का चक्कर था,
गाढ़ी लस्सी संग मक्खन था,
शुद्ध घी और शक्कर था,
बहुत याद आती है तेरी,
असली जीवन तो तुझमें था,
ऐ बचपन फिर लौट के आ,
यौवन से तू बढ़कर था।


“केसरी”(Kesri)(Saffron)

केसरी रंग हमारे जीवन का अभिन्न अंग है। केसरिया सात्विक माना गया है। सूर्योदय हो या सूर्यास्त, केसरिया रंग अपनी छटा बिखेरता ही है। अग्नि की आभा में भी केसरिया रंग की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। केसरी जो लाल और पीले रंगों का मिश्रण है, इसे देखते ही सारी निराशाएं मिट जाती हैं। यह नवीनता और सृजनता का प्रतीक है।

(Saffron color is an integral part of our life. Saffron is considered virtuous. Whether it is sunrise or sunset, the saffron color spreads its shadow. Saffron color also plays an important role in aura of fire. Saffron, which is a mixture of red and yellow colors, dissipates all disappointments upon seeing it. It is a symbol of newness and creativity.)

हवाओं का रुख है
दिशा केसरी में,
चला चल खिंचा चल
दिशा केसरी में,
सुना है पवन
केसरी हो गई है,
बहा चल पवन संग
दिशा केसरी में,
डूब जा केसरी में
लगा प्रेम गोता,
समंदर की लहरें
हुई केसरी हैं,
सूर्योदय पूर्व का
केसरी है,
आभूषण स्वर्ण के
केसरी हैं,
कश्मीर का केसर
केसरी है,
पकी गेहूँ खलिहानों में
केसरी है,
नवीनता सृजनता
घटित हो रही है,
ध्वजा केसरी हैं
गुंबद केसरी हैं,
सर्वत्र केसरी है
सर्वत्र ईश्वरी है।