“प्रेम” (Love)

तेरी प्रकृति इतनी सुंदर है तो तूं कितना सुंदर होगा…..
If your nature is so beautiful, how beautiful you will be…..

हो कुसुमलता इतराती सी,
जो मस्त पवन लहराती सी,
पल पल प्रतिपल पलछिन प्रतिक्षण,
जीवन की आस बढ़ाती सी,
हों कमल पंखुड़ी खिली खिली,
हों ताल के बीच सुहाती सी,
नभ के तारे थल के जुगनू,
हो रात्रि चमक बढ़ाती सी,
हो चाँदनी पूनम चन्दा की,
सागर को मोहित करती सी,
हों ओस की बूंदें फूलों पर,
हर बूंद में किरण चमकती सी,
जल के भीतर कलरव करती,
हो बादल की परछाईं सी,
हो पर्वत श्रृंखला नीली सी,
हो बर्फ की चादर ओढ़ी सी,
हो मधुबन घाटी फूलों की,
सब धरा को हो महकाती सी,
इन सबमें कहीं मैं खो जाऊँ,
तेरे प्रेम में ही मुस्काती सी।


आपकी टिप्पणियों की प्रतीक्षा है….साथ ही साथ शेयर भी कर दीजिएगा…😊🙏आभार, जसविंदर सिंह, हिमाचल प्रदेश