“सत्य” (Truth)

प्रार्थना

सत्य की परिभाषा हो तुम,
सदा सर्वदा ही सत्य हो तुम,
न तेरा आरम्भ होता,
और न ही होता है अंत,
सब कुछ तुम्हीं से है खिला,
सब कुछ तुम्हीं में है मिला,
सर्वत्र समाया है तुम्हीं में,
सर्वत्र में समाए हो तुम,
हर क्षण में जागृत हो तुम्हीं तुम,
कण कण में आच्छादित हो तुम,
चाशनी में झूठ की,
लिपटा हुआ है हर कोई,
सत्य का अनुभव करा दो,
सत्य हमें भी कर दो तुम।


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“दुआ” (Prayer)

जब किसी को भीख मांगने की आदत पड़ जाती है, तो वह हर जगह ठोकर खाता है। दरअसल हम सभी भिखारी हैं जो हर दिन भगवान से कुछ न कुछ चाहते हैं। लेकिन मांगने के साथ-साथ हमें बांटना भी आना चाहिए और किसे मिलता है…आइए देखें…
When someone gets used to begging, he stumbles everywhere. Actually we all are beggars who demands something from God every day. But along with demanding, we should also learn to distribute and who gets….Let’s see…

सुना है दुआओं में
बड़ी ताकत होती है,
सुन लीं जाएं तो
बड़ी इनायत होती है,
जो पास नहीं होता
उसी की तो चाहत होती है,
किसी की दुआओं में पैसा,
किसी के औलाद होती है,
सौगातों की चाहत से ही तो
फरियाद होती है,
मिलतीं नहीं हैं उनको
जिनके दिलों में खार होती है,
जो देना नहीं जानते,
सिर्फ लेने की चाह होती है,
रब उनकी नहीं सुनता
जिनकी सोच बेकार होती है,
सच तो यह है
जिन्हें मांगना भी नहीं आता,
मासूमियत में उन्हीं की
पूरी चाह होती है,
जिनके होते हैं दिल साफ
आईने की तरह,
उनकी तो बिन बोले ही
पूरी हर मुराद होती है।

Have heard that prayers have the big power,
It is a great grace, if God listen someone’s,
We want those which we don’t have,
Someone prayer for money,
Someone prayer for children,
We do prayer to fulfil our wishes,
But their prayers are not fulfilled,
who have deceit in their hearts,
God never listen to those, whose thinking is not good,
Those who do not know to give,
Only want to take,
Truth is this
God fulfills the desires of those,
Who are innocent by nature and dont know to demand everytime,
His every wish is fulfilled by the God,
Whose heart is clean like glass.


Please comment about this poetry and please don’t forget to share. Regards, Jasvinder Singh, Himachal Pradesh

“विस्मरण” (Oblivion)

हम भले ही इस जन्म में कितनी ही ऊंचाइयों को छू लें, कितना ही सुखी क्यों न हो जाएं, पर भीतर एक खालीपन, एक रीतापन, कुछ कमीं, कुछ तड़प सदैव महसूस होती है। इसीलिए सुख भोगते हुए भी, आनंद की कमी हमेशा रहती है।
कारण एक ही है, ईश्वर को किए हुए वायदे को भूलना…..जो हम गर्भ में करके आए थे और जन्म लेते ही भूल गए…
विस्मरण को स्मरण में बदलते ही खालीपन भरने लगता है। No matter how much we achieved in our life, no matter how happy we are, but there is always an emptiness, some deficiencies, some yearning. That’s why, even while enjoying happiness, there is always a lack of pleasure. The reason is same, we’ve made promise to God in the womb and forgot as soon as we were born…
As soon as forgetfulness changes into remembrance, emptiness begins to fill.

चावल के दाने से लेकर,
दो बित्तों तक बड़ा किया,
गर्भ में तुझको पाला पोसा,
और धरा पर खड़ा किया,
करी व्यवस्था दूध की,
प्रथम तुझे आहार दिया,
बचपन तूने खेल बिताया,
यौवन का अंहकार किया,
उतरा यौवन ढली जवानी,
अधेड़ावस्था पार किया,
हुआ जीर्ण बदन अब तेरा,
जीवन का उपहास किया,
भूल गया जब तूँ भीतर था,
अंधकारमय जीवन था,
नौ माह तक तूँ कष्ट में लटका,
नर्क में तेरा डेरा था,
की प्रार्थना हे भगवन,
मुझे बचा इस जाल से,
उलझ गया हूँ पुलझ गया हूँ,
ले उबार जंजाल से,
रख ले मुझको बचा ले जीवन,
अब तूँ मुझको पाल ले,
करता हूँ वादा मैं तुमसे,
बाहर जब मैं जाऊंगा,
फँसूंगा न किसी और कृत्य में,
सुमिरन करता जाऊँगा,
भूल गए जो याद करो,
सोचो और विचार करो,
अभी नहीं बिगड़ा कुछ बंदे,
सुमिर के निज कल्याण करो।