जागो Wake up

हमारी पूरी जिंदगी जोड़ – घटाव यानी सुख का पीछा करने में ही बीत जाती है और हम असली सुख देने वाले को बिसारते रहते हैं, परन्तु सोते से जागने और सच्चे सुख को पाने की शुरुआत कभी भी हो सकती है।

उम्र बढ़ती रही,
मैं बिगड़ता रहा,
लालसा बढ़ती रही,
मैं बढ़ाता रहा,
मासूमियत छोड़ कर,
वह बचपन की,
जवानी में गोते लगाता रहा,
मैं जोड़ता रहा,
तमाम उम्र बहुत कुछ,
पर अनमोल सांसें गंवाता रहा,
मैं समझता रहा,
गहरे समंदर में खुद को,
पर कीचड़ में खुद को लिपटाता रहा,
दुनिया को हर पल निहारा किया,
पर खुद से ही,
नजरें चुराता रहा,
जो न करना था,
वह ही किया उम्र भर,
जो था करना,
उसी से किनारा मैं करता रहा,
गर अब भी जाग जाऊं,
सोते से आज भी,
मिलेगा वह जो,
हर क्षण है,
दिल में धड़कता रहा।


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