“बढ़े चलो”(Go ahead)

न हार मानो, न ही रुको, न ही थको, चलो, आगे बढ़ो…लक्ष्य प्रप्ति निश्चित है।
Don’t give up, don’t stop, don’t be tired…Come on, go ahead … the goal is certain.

न रुको
तुम डटो,
प्रताप सूर्य
का बनो,
न थको
निसदिन चलो,
कण कण का तुम
उत्साह बनो,
ले सच का
ओट आसरा,
सच की दिशा
में ही बढ़ो,
ध्वजा को थाम
धर्म की,
काल अधर्म
का बनो,
नव ज्योति
कर प्रज्ज्वलित,
नवयुग का तुम
सृजन करो। – जसविंदर सिंह


Please share my motivational poem. Regards, Jasvinder Singh

संकल्प शक्ति (Willpower)

कभी-कभी हमारे भीतर विचारों का अंतर्द्वंद चलता रहता है। पर यदि संकल्प शक्ति हो तो आसानी से मन पर विजय पाई जा सकती है।(Sometimes there is a conflict of thoughts within us.  But if you have the power to resolve, then the mind can easily be conquered.)


आज मन था कुछ गमगीन,
कवितायें लिख दीं तीन,
मन बुझा बुझा सा बोझिल था,
चिंता के जाल में उलझा था,
कलम ने उठ कुछ लिखना चाहा,
पर मन को यह सब न भाया,
उसे तो करनी मनमानी थी,
उसकी तो यह जन्मजात निशानी थी,
पर हिम्मत कर कलम बोली,
वैसे तो मेरी सांसें फूलीं,
तुझसे कौन जीत सका है,
हर कोई तो तुझसे थका है,
पर अब मैं तुझसे हार न मानूं,
मुझे झुका तो मैं जानूं,
तूं चाहता लिखूँ गम की गज़ल,
कर दूं सबकी आंखें सजल,
पर मेरी नहीं यह नीयत है,
मेरी हरी भरी तबीयत है,
डिस्चार्ज न मैं हो पाऊंगी,
कोरे कागज के सीने पे,
नित ऊर्जा भरती जाऊंगी।