धागा Thread

यूँ तो हल्का फुल्का,
दुबला पतला मैं धागा हूँ,
फिरकी पे लिपटा रहता,
खुद में सिमटा रहता हूँ,
दूकानों पर डिब्बों के भीतर,
खड़ा पड़ा रहता हूँ,
रंग अनेकोंनेक लिए,
चहुं ओर नजर आता हूँ,
सूती रेशमी टेरीकॉट,
नाइलॉन में दिख जाता हूँ,
हर कपड़े के भीतर दिखता,
सब कुछ ढंक जाता हूँ,
नींबू मिर्चा डाल गले,
नजरबट्टू बन जाता हूँ,
भरवां सब्जी के ऊपर बंध,
स्वाद बढ़ा जाता हूँ,
सुई हो हाथ में या मशीन में,
संग सदा रहता हूँ,
काम वफादारी से करता,
सब में बिंध जाता हूँ,
दिल से दिल के बीच पुली का,
काम भी कर जाता हूँ,
मोह से बुनकर रिश्तों को,
पक्का करता जाता हूँ,
धागा बन विश्वास का मैं,
दूरी हर इक मिटाता हूँ,
भाई के हाथ पे बंध के मैं,
बहना से प्यार बढ़ाता हूँ,
सच कहता हूं,
सच का भी बंधन मैं बन जाता हूँ,
प्रेम के रस में सन के मैं,
प्रभु को भी संग लिवा लाता हूँ।