Truth – only Truth

If you think carefully, everything in this world is false…because when life is not true, then what else will be true. Only Almighty God, which is sitting within us, is true

This world is illusion only,
All you want will be lost,
All you want will be snached,
All you want will be robbed,
Lie is spread everywhere,
Whatever we believe that is to be the true – that’s all lie,
Like when a balloon explodes –
the air leaves in an instant,
Everything is illusion only – not truth
The truth is hidden only
within ourselves,
Leave outside – peep inside,
The truth is shining in heart as gem.


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“बड़े बोल”(Spiel)

अपनी ओर से बातें जोड़कर मूल बात का स्वरूप कितना ही बदलने का प्रयत्न क्यों न किया जाए, वह दमहीन ही रहता है और सच बात का स्वरूप सर्वथा सत्य ही बना रहता है।
No matter how much we try to change the nature of the original matter by adding things on our behalf, it remains powerless and the nature of the truth remains completely true.

कुछ पढ़ा
कुछ गढ़ा,
कुछ था सच
कुछ मढ़ा,
कुछ था जुड़ा
कुछ जड़ा,
पर था फीका
रसहीन रहा,
जो उपरंत जुड़ा
दमहीन रहा,
जो था मिथ्या
वह गया बिखर,
बिन सोचे समझे
बिन जाने,
बिन निज अनुभव के
अनजाने,
वह तेजहीन ही
बना रहा,
था जो मूल
वह बचा रहा,
और अनंत काल तक
अमर रहा।


Please share as much as. Regards, Jasvinder Singh

“सच” (Truth)

अक्सर सुनी सुनाई बातें सच नहीं होतीं।
सच्चाई कुछ और ही होती है, बयान कुछ और ही की जाती है। एक के बाद दूसरा, दूसरे के बाद तीसरा, जो जो बात सुनता जाता है, अपने ढंग से कुछ घटा बढ़ा कर बोल देता है। इस कारण परिवार, समाज और यहां तक कि देश भी टूटने की कगार पर आ जाते हैं। इसलिए बात को आराम से सुन कर समझना चाहिए और अपनी तरफ से बिना कुछ जोड़े घटाए ही बोलना चाहिए।
Often the things heard are not true. The truth is different, the statement is made differently. One after the other, the third after the other, whoever listens, speaks a little in his own way. For this reason, family, society and even the country fall on the verge of breakdown. That is why one should listen comfortably and understand and speak without subtracting a few from your side.

कहा कुछ गया,
सुना कुछ गया,
कुछ याद रहा,
कुछ भूल गया,
जो याद रहा,
वह बड़ा हुआ,
जो भूल गया,
वह पड़ा रहा,
जो पड़ा रहा,
वह दबा रहा,
जो दबा रहा,
वह दफन हुआ,
जो सच था,
वही तो दफन हुआ,
जो गढ़ा गया,
वह तो बढ़ता ही रहा,
कुछ झड़ता कुछ जुड़ता बड़ा हुआ,
जो बड़ा हुआ,
वह दिखता रहा,
यूं ही बात से बात निकलती रही,
था कुछ और और ही बनती रही,
धीरे धीरे ही सही,
सच सामने आता रहा,
झूठ तो झूठ था,
जाता रहा,
जो सच था,
रहा और आगे बढ़ा,
सच तो यह है,
सच ही सच्चा रहा।

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