समय Time

समय को समझने के लिए व्यक्ति को समय में खो जाना पड़ता है…
One has to be lost itself into time to understand time….

अनंत काल से अनंत काल तक,
घण्टा समय का बज रहा है,
न जाने किस घड़ी – किस क्षण से,
चक्का इसका चल रहा है,
एक से लेकर बारह तक यह,
लगा के चक्कर घूम रहा है,
कभी न रुकता – कभी न थमता,
अद्भुत शक्ति से भरा हुआ है,
पैदा किया है इसने हर क्षण,
हर युग में मौजूद रहा है,
नहीं है गणना इसकी कोई,
कब से चक्र यह घूम रहा है,
कहीं न आता – कहीं न जाता,
पर हर कहीं यह देख रहा है,
सभी हैं निकले इसमें से ही,
सब कुछ इसी में सिमट रहा है,
समय बड़ा बलवान है – सच है,
समय पे सब कुछ घट रहा है,
झांकें इसमें ज्योतिष – गणितज्ञ,
हर विषय इसी से निकल रहा है,
जिसने जान लिया है इसको,
वही ज्ञान को प्राप्त हुआ है।


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समय Time

समय को समझने के लिए व्यक्ति को समय में खो जाना पड़ता है…
One has to be lost itself into time to understand time….

अनंत काल से अनंत काल तक,
घण्टा समय का बज रहा है,
न जाने किस घड़ी – किस क्षण से,
चक्का इसका चल रहा है,
एक से लेकर बारह तक यह,
लगा के चक्कर घूम रहा है,
कभी न रुकता – कभी न थमता,
अद्भुत शक्ति से भरा हुआ है,
पैदा किया है इसने हर क्षण,
हर युग में मौजूद रहा है,
नहीं है गणना इसकी कोई,
कब से चक्र यह घूम रहा है,
कहीं न आता – कहीं न जाता,
पर हर कहीं यह देख रहा है,
सभी हैं निकले इसमें से ही,
सब कुछ इसी में सिमट रहा है,
समय बड़ा बलवान है – सच है,
समय पे सब कुछ घट रहा है,
झांकें इसमें ज्योतिष – गणितज्ञ,
हर विषय इसी से निकल रहा है,
जिसने जान लिया है इसको,
वही ज्ञान को प्राप्त हुआ है।


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सांसें Breath

हम पर बड़ी मेहरबानी है कि हमें सांसों का तोहफा मिला हुआ है। इससे पहले कि यह खत्म हो जाएं, हम ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करें और सभी के लिए अपने दिल में मोहब्बत और हमदर्दी रखें।
Almighty God has given all of us precious gift in the form of breaths. We should all thank God and should keep compassion in our hearts for all beings.

वक्त का लम्हा कुछ ऐसे ही,
आगे से गुजर जाता है,
और मैं बेबस खड़ा,
बस देखता रह जाता हूँ,
जिंदगी से सांसें कुछ,
और निकल जातीं हैं,
मैं यूं ही ठगा सा,
खड़ा रह जाता हूँ,
उलटता पलटता हूँ,
ख्यालों को अपने,
अंजाने ही,
ढेरी सी लगाता चला चला जाता हूँ,
इक ख्याल को नापता हूँ,
तौलता हूँ इक को,
खुद ही उसमें उलझ पुलझ जाता हूँ,
इक ढेरी तो सिमटती नहीं,
दूजी में फिर से खो जाता हूँ,
अपनी अक्ल के घोड़ों से,
दौड़ खूब लगवाता हूँ,
जान के भी अंजान ही रहता,
समझ नहीं कुछ पाता हूँ,
जितनी बार हैं गिरतीं पलकें,
मौत को गले लगाता हूँ,
ताज्जुब होता है तब मुझको,
जब खुद को फिर से जिंदा पाता हूँ,
मोहब्बत तुम्हें भी है मुझसे,
यही कयास लगाता हूँ,
तभी तो इक के जाते ही,
दूजी सांस ले पाता हूँ।


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