चैन की बंशी Happy Life

वास्तव में भाग्य प्रारब्ध पर ही आधारित होता है, परन्तु यह ध्रुव सत्य है कि अपने सत्कर्मों और अथक प्रयासों से धूमिल भाग्य को सुनहरे भाग्य में बदला जा सकता है।
It’s true that destiny is based on our previous activities, but this is the absolute truth that our sacret and relentless efforts are capable to turn foggy destiny into golden destiny.

ज्योतिष सीखी मैने भी,
बड़े जोर और शोर से,
देखे हाथ दूसरों के,
और माथे हर ओर से,
इक दिन मुझको मिली थी छुट्टी,
आपाधापी के दौर से,
न जाने क्या सोच के,
अपनी ही हथेली देखी गौर से,
बड़ा ही आश्चर्यचकित हुआ था,
अरे यह क्या घटित हुआ था,
रेखाओं के नाम पे बस इक,
कड़े जतन की रेखा थी,
बन्द मुट्ठी के भीतर वह तो,
अब तक ही अनदेखा थी,
उस रेखा को न देखा था,
जो जीवन का लेखा थी,
लगी समझ अब मुझको भी,
कुछ न होगा रेखाओं से,
रेखाएं तो बनतीं मिटती,
मेरे अपने कर्मों से,
धर्म श्रेष्ठ है रेखाओं से,
धर्म तो है सत्कर्मों से,
करता हूं अब कठिन परिश्रम,
बजती बंशी चैन से।

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“कर्म” (Act)

निराश होकर हाथ पर हाथ रखकर बैठ जाना आत्महत्या के समान है। पूरे उत्साह से काम में लग जाने से सफलता मिलना अवश्यम्भावी है।
Getting frustrated and leaving work is like suicide. It is inevitable to get success by working hard with full enthusiasm.

धरो धीर
मत हो अधीर,
रहो शांत
मिट जाए पीर,
करो कर्म
न करो शर्म,
सच पे डटो
है यही धर्म,
रहो शान्त
न करो क्रोध,
रहो प्रसन्न
मिटें अवरोध,
सोचो कम
तोड़ो सब भ्रम,
छोड़ो आलस्य
और करो श्रम,
होगी पूरी
तब तेरी आस,
जब दृढ़ होगा
मन में विश्वास।
– जसविंदर सिंह


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